राज बी शेट्टी की आवाज़: एक नई यात्रा का आरंभ
क्या आपने कभी सोचा है कि एक फिल्म या वेब सीरीज़ सिर्फ एक भाषा में नहीं, बल्कि कई भावनाओं में बुनती है? ऐसा ही कुछ हुआ जब कन्नड़ फिल्म "सु फ्रॉम सो" का मलयालम डब संस्करण दर्शकों के बीच आया। इस फिल्म के अभिनेता और निर्माता राज बी शेट्टी ने इस डबिंग प्रक्रिया के पीछे की मेहनत और संघर्ष को साझा किया।
मेहनत का फल
राज बी शेट्टी, जो इस फिल्म के मुख्य अभिनेता हैं, ने बताया कि दर्शकों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे इसे सिर्फ एक डब फिल्म के तौर पर न देखें। उन्होंने कहा कि इस फिल्म के डबिंग में बहुत मेहनत की गई है ताकि हर एक संवाद और भावना को सही तरीके से प्रस्तुत किया जा सके। उनके लिए यह सिर्फ एक व्यापारिक कदम नहीं था, बल्कि अपने दर्शकों के साथ एक नए अनुभव को साझा करने का एक अनूठा अवसर था।
भावनाओं का सही संचार
राज ने बताया कि डबिंग प्रक्रिया में न केवल आवाज़ का सही चयन किया गया है, बल्कि भावनाओं को भी पूरी तरह से पकड़ा गया है। उनका मानना है कि एक अच्छी डबिंग वही होती है, जब दर्शक यह महसूस करें कि वे मूल फिल्म को देख रहे हैं। इस फिल्म के जरिए, उन्होंने दर्शकों को एक नई दृष्टि दी है, जहाँ भाषा की सीमाएँ नहीं होतीं।
भारतीय सिनेमा का नया अध्याय
इस डबिंग के पीछे का मकसद सिर्फ दर्शकों को मनोरंजन देना नहीं था, बल्कि भारतीय सिनेमा की विविधता को भी दर्शाना था। राज बी शेट्टी का कहना है कि जब हम एक फिल्म को कई भाषाओं में प्रस्तुत करते हैं, तो हम उस कहानी के साथ-साथ उस संस्कृति को भी जीवित रखते हैं।
इस फिल्म का मलयालम संस्करण उन सभी दर्शकों के लिए एक खास अनुभव लेकर आया है, जो नई कहानियों की खोज में रहते हैं।
प्लेटफॉर्म पर उपलब्धता
यदि आप इस दिलचस्प और भावनात्मक यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो इसे Netflix पर देख सकते हैं।
क्या आपने कभी किसी फिल्म को एक नई भाषा में देखा है? उस अनुभव ने आपको कैसा महसूस कराया? आइए, इस पर चर्चा करें!









