स्मृति ईरानी की यादें: ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ की विरासत
जब भी भारतीय टीवी सीरियलों की बात होती है, एक नाम हर किसी की जुबान पर होता है — ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’। यह शो न केवल एक धारावाहिक था, बल्कि हमारे समाज की रगों में एक ऐसा जादू बिखेरता था, जिसने परिवारों को एक साथ बैठने पर मजबूर कर दिया। आज हम बात करेंगे इस शो की अद्भुत विरासत और उसके प्रभाव के बारे में, जैसा कि स्मृति ईरानी ने इसे याद किया।
यादों का सफर
स्मृति ईरानी, जिन्होंने इस शो में तुलसी का किरदार निभाया, ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि यह शो सिर्फ मनोरंजन नहीं था, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन का हिस्सा था। शो ने महिलाओं को सशक्त बनाने का काम किया। उन्होंने बताया कि कैसे इस धारावाहिक ने भारतीय परिवारों में संवाद को बढ़ावा दिया और रिश्तों में एक नई सोच का संचार किया।
सास-बहू का संघर्ष
इस शो ने हमें सास-बहू के रिश्ते की जटिलताओं को गहराई से समझाया। देखने वालों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि अपने जीवन में भी उन मुद्दों पर विचार किया। स्मृति की बातों से यह साफ था कि यह शो सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक दर्पण था, जो समाज की सच्चाइयों को उजागर करता था।
आज की प्रासंगिकता
समय के साथ, जबकि समाज में बदलाव आ रहे हैं, यह शो आज भी प्रासंगिक है। स्मृति ने कहा कि यह धारावाहिक हमें सिखाता है कि कैसे पारिवारिक बंधनों को मजबूत किया जा सकता है और कैसे प्यार और समझदारी से किसी भी रिश्ते को संजोया जा सकता है। उनकी बातें सुनकर ऐसा लगता है कि यह शो आज भी उसी ऊर्जा और भावनाओं के साथ जीवित है।
प्लेटफॉर्म की जानकारी
यदि आप इस अद्भुत कहानी को फिर से जीना चाहते हैं, तो इसे आप Disney+ Hotstar पर देख सकते हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी ज़िंदगी में कौन सा टीवी शो सबसे ज्यादा असर डाल सकता है? क्या ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ ने आपके रिश्तों को प्रभावित किया? अपने विचार हमारे साथ साझा करें!









