कॉन्स्टेबल कणकम: एक अनकही कहानी की खोज
जब भी हम किसी थ्रिलर की बात करते हैं, तो हमारी उम्मीदें आसमान छूने लगती हैं। लेकिन क्या होता है जब वह थ्रिलर हमारी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता? ‘कॉन्स्टेबल कणकम’ इसी तरह की एक वेब सीरीज़ है, जिसका कथानक तो दिलचस्प है, लेकिन यह पूरी तरह से चमकने में असफल रहती है।
कहानी की झलक
‘कॉन्स्टेबल कणकम’ की कहानी 1990 के दशक में आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गाँव में सेट की गई है। यहाँ एक अजीब घटना घटित होती है, जहाँ हर वह व्यक्ति जो अदिवि गुट्टा सीमा को पार करता है, वह mysteriously गायब हो जाता है। इस रहस्य को सुलझाने का जिम्मा उठाती हैं कॉन्स्टेबल कणकम, जिसे निभाया है वरशा बोल्लमा ने। जब उसकी करीबी दोस्त भी इसी तरह गायब हो जाती है, तो वह खुद इस मामले की तहकीकात करने निकल पड़ती है। क्या वह इस रहस्य को सुलझा पाएगी? यही है इस शो की मूल कहानी।
अभिनय और निर्देशन
डायरेक्टर प्रशांत कुमार डिम्माला ने इस सीरीज़ में कुछ बेहतरीन कास्टिंग की है, जिसमें राजीव कनकाला का अभिनय विशेष रूप से सराहनीय है। वह शो में अपनी भूमिका को बखूबी निभाते हैं और अपने अभिनय से कहानी को गहराई देते हैं। वरशा की भूमिका ठीक होने के साथ-साथ उसके किरदार की गहराई का कम आंका गया है। शो में उसकी दोस्ती और गायब होने वाली लड़की के बीच का रिश्ता मजबूत दिखाया गया है, लेकिन उस दर्द को पूरी तरह से नहीं दर्शाया गया है जो ऐसी घटनाओं से होता है।
सिनेमैटोग्राफी और संगीत
इस सीरीज़ की सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन वैल्यूज़ उत्कृष्ट हैं। दृश्य प्रभाव काफी आकर्षक हैं, जो दर्शक को गाँव की माहौल में डुबो देते हैं। सुरेश बोब्बिली की संगीत रचना और बैकग्राउंड म्यूजिक भी कहानी में जान डालते हैं। संवाद और एडिटिंग भी अच्छी है, जो दर्शकों का ध्यान बनाए रखते हैं।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
हालांकि शो में कुछ अच्छे पल हैं, लेकिन एक गहरा प्रभाव डालने में यह असफल रहता है। कई दर्शकों ने इसकी गति को धीमा और कुछ स्थानों पर नीरस बताया है। जबकि यह एक सरल थ्रिलर है, लेकिन इसमें वो ‘वाह’ फैक्टर गायब है जो दर्शकों को बांध सके।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ‘कॉन्स्टेबल कणकम’ एक साधारण थ्रिलर है, जिसमें कुछ अच्छे पल हैं लेकिन कोई विशेषता नहीं है। अगर आप थ्रिलर के शौकीन हैं, तो इसे एक बार देख सकते हैं, लेकिन अपने उम्मीदों को सीमित रखें।
यह वेब सीरीज़ ETV Win और OTTplay Premium पर स्ट्रीम की जा सकती है और इसे 5 में से 2.5 की रेटिंग दी गई है।
क्या आपको लगता है कि इस तरह की कहानियाँ हमें वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जोड़ती हैं, या ये सिर्फ एक मनोरंजन का साधन हैं? अपनी राय साझा करें!









