क्या अक्षय कुमार सच में ‘संक्रांतिकी वस्तुनाम’ के हिंदी रीमेक में दिखेंगे?
जब भी बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार की बात होती है, तो उनके फैंस का उत्साह बढ़ना लाजिमी है। हाल ही में, एक चर्चा ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी — क्या अक्षय कुमार तेलुगू ब्लॉकबस्टर ‘संक्रांतिकी वस्तुनाम’ के हिंदी रीमेक में नजर आएंगे? यह सवाल हर किसी की जुबान पर था, और इस पर कई प्रकार की अटकलें लगाई जाने लगीं।
रीमेक की अफवाहें
कई रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कहा जा रहा था कि अक्षय इस एक्शन-कॉमेडी फिल्म में मुख्य भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही, मशहूर निर्देशक अनीस बज्मी इस रीमेक का निर्देशन करेंगे। लेकिन ऐसा लगता था कि इन चर्चाओं ने सभी को हद से ज्यादा उत्साहित कर दिया था। फिल्म प्रेमियों के बीच इस फिल्म की शूटिंग की संभावित तारीखें भी चर्चा का विषय बन गईं।
असली सच क्या है?
हालांकि, जैसे ही सोर्स से जानकारी आई, पता चला कि अक्षय कुमार इस रीमेक का हिस्सा नहीं बनने वाले हैं। एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि अक्षय ने ‘संक्रांतिकी वस्तुनाम’ को एक फिल्म प्रेमी के रूप में देखा था, लेकिन हिंदी रीमेक करने के कोई प्लान नहीं हैं। इसके अलावा, उनके अनीस बज्मी और दिल राजू के साथ काम करने की अफवाहें भी गलत साबित हुईं।
कुमार वास्तव में अनीस बज्मी के साथ किसी और प्रोजेक्ट पर चर्चा कर रहे हैं, जो कि इस रीमेक से अलग है।
अक्षय के पास हैं कई प्रोजेक्ट्स
सूत्रों के अनुसार, अक्षय के पास कई फिल्में तैयार हैं, जैसे ‘हैवान’, ‘भागम भाग 2’, ‘वेलकम टू द जंगले’ और ‘हेरा फेरी 3’। हाल ही में, उन्होंने ‘जॉली एलएलबी 3’ में भी शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें अरशद वारसी, सौरभ शुक्ला और हुमा कुरेशी जैसे सितारे शामिल थे।
अक्षय फिलहाल अपने मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और आगे की योजनाओं में कोई बदलाव नहीं करना चाहते हैं।
क्या आपके लिए यह अफवाहें दिलचस्प हैं?
इस तरह की चर्चाएं और अफवाहें अक्सर बॉलीवुड में आती-जाती रहती हैं। क्या आपको लगता है कि अक्षय कुमार को इस तरह के रीमेक में हिस्सा लेना चाहिए या उन्हें अपने सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों पर ध्यान देना चाहिए? आपकी राय हमें जरूर बताएं!
यह लेख नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर नहीं बल्कि अक्षय कुमार की अन्य फिल्मों और उनकी आगामी परियोजनाओं पर केंद्रित है।
आपका क्या ख्याल है? क्या हमें इस तरह की फिल्मों की बजाय कुछ नया और सामाजिक सन्देश देने वाली फिल्मों की आवश्यकता नहीं है?









