13th: कुछ सबक कक्षा में नहीं सिखाए जाते
कभी सोचा है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में क्या कमी है? या फिर क्या यह भी सच है कि कुछ महत्वपूर्ण सबक हमें कक्षाओं में नहीं सिखाए जाते? SonyLIV की नई वेब सीरीज़ "13th" हमें इसी सोच की गहराई में ले जाती है। यह कहानी एक ऐसे युवा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने सपनों के पीछे भागने की कोशिश करता है, लेकिन रास्ते में कई बाधाएं आती हैं।
कहानी का सार
कहानी शुरू होती है रितेश (परेश पहुजा) से, जो एक फंडिंग कंपनी में काम कर रहा है, जहां स्टार्टअप संस्कृति का बोलबाला है। लेकिन एक दिन अपने कॉलेज के मेंटर, एमटी सर (गगन देव रियार) से मिलने के बाद, उसकी सोच में बदलाव आता है। रितेश समझता है कि उसे एक ऐसा काम करना है जो समाज के लिए कुछ अच्छा करे। वह अपनी आकर्षक नौकरी छोड़कर एक एड-टेक स्टार्टअप शुरू करने का फैसला करता है, जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में शिक्षा पहुंचाना है जहां अभी भी यह एक विशेषाधिकार है। लेकिन क्या रितेश की महत्वाकांक्षाएं इन चुनौतियों के बीच टिक पाएंगी?
निर्देशन और लेखन
"13th" का निर्देशन निसिल शेट और लेखन समीर मिश्रा ने किया है। हालांकि, उनकी कोशिशों में एक कमी नजर आती है। कहानी में गहराई की कमी है और पात्रों का विकास भी बहुत सीमित है। रितेश और एमटी सर की भूमिका में दोनों अभिनेता अपनी भूमिका में पूरी ईमानदारी से उतरते हैं, लेकिन लेखन की कमी के कारण उनके पात्र एकतरफा नजर आते हैं।
सीरिज़ की सिनेमैटोग्राफी
सिनेमैटोग्राफी की बात करें तो, "13th" ने कुछ अच्छे दृश्य प्रस्तुत किए हैं, लेकिन इनमें कोई नई बात नहीं है। कहानी का प्रवाह भी कुछ हद तक थम जाता है, जिससे दर्शक ऊबने लगते हैं।
संगीत
संगीत की बात करें तो, बैकग्राउंड स्कोर ठीक है, लेकिन यह कहानी की भावनाओं को पुख्ता करने में असफल रहता है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
दर्शकों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। कुछ ने इसे एक प्रेरणादायक कहानी माना, जबकि अन्य ने इसे एक साधारण प्रस्तुति के रूप में देखा।
निष्कर्ष
"13th" एक दिलचस्प विषय पर आधारित है, लेकिन यह अपनी प्रारंभिक संकल्पना से बाहर नहीं निकल पाती। यह स्टार्टअप की दुनिया को एक नई दृष्टि से देखने का प्रयास करती है, लेकिन इसके किरदार और कहानी की गहराई की कमी इसे एक साधारण कार्य बना देती है।
"13th" अब SonyLIV पर स्ट्रीम कर रही है और इसे 5 में से 2 रेटिंग दी गई है।
क्या आपको लगता है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है? या फिर हमें अपनी सोच को बदलने की जरूरत है? आपके विचार क्या हैं?









