बिग बेन: एक अनकही कहानी की कमजोर प्रस्तुति
कई बार, एक फिल्म का विषय इतना प्रासंगिक होता है कि दर्शक उससे जुड़ना चाहेंगे। लेकिन जब वह कहानी कमजोर पटकथा और असंगत किरदारों में उलझ जाती है, तो दर्शकों का उत्साह ठंडा पड़ जाता है। ‘बिग बेन’ इसी तरह की एक फिल्म है, जिसमें अनू मोहन और अदिति रवि ने मुख्य भूमिका निभाई है।
कहानी का सारांश
फिल्म ‘बिग बेन’ में, लवली अपने पति जीन एंथनी और उनकी बेटी के साथ लंदन में खुशहाल जीवन जी रही होती है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, जीन की एक और ही सूरत सामने आती है, जो कई घटनाओं के बाद उनकी बेटी को अधिकारियों द्वारा छीन लेने का कारण बनती है। अब जीन, जो कि केरल का एक निलंबित पुलिस अधिकारी है, अपनी बेटी को वापस लाने के लिए किसी भी हद तक जाने का निर्णय लेता है।
निर्देशन और पटकथा
बिनो ऑगस्टिन के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक वास्तविक घटना पर आधारित होने का दावा करती है। हालाँकि, जीन का चरित्र अचानक बदलता है, और दर्शकों को यह बदलाव अजीब लगता है। कुछ समय बाद, फिल्म एक संघर्ष में बदल जाती है, जहाँ जीन का गुस्सा और उसकी चतुराई दोनों ही दर्शकों को प्रभावित करने में असफल रहते हैं।
अभिनय की परख
अनू मोहन का अभिनय इस फिल्म में अपेक्षित गहराई नहीं ला पाता। हालांकि, अदिति रवि ने लवली के किरदार को कुछ भावनाओं के साथ निभाने का प्रयास किया है। उनका दुःख दर्शाने के दृश्य प्रभावी हैं, लेकिन पूरी फिल्म में एक स्थिरता की कमी है।
तकनीकी पक्ष
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, जो आजाद कालू द्वारा की गई है, अच्छी है, खासकर दूसरे भाग में। लेकिन कहानी की गति और घटनाक्रम में विश्वसनीयता की कमी इसे एक कमजोर अनुभव बनाती है। कई स्थानों पर विदेशी अधिकारियों से जुड़ी प्रक्रियाएं अविश्वसनीय लगती हैं।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
फिल्म का दूसरा भाग तेजी से आगे बढ़ता है, जो इसे कुछ हद तक देखने योग्य बनाता है। लेकिन जब दर्शक कहानी के वास्तविकता से जुड़े पहलुओं पर विचार करते हैं, तो यह अनुभव कहीं न कहीं अधूरा सा लगता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ‘बिग बेन’ एक ऐसी फिल्म है जो अपने विषय के बावजूद प्रभाव छोड़ने में असफल रहती है। कमजोर चरित्र विकास और अविश्वसनीय कहानी इसे एक साधारण फिल्म बना देती है। इसे 2/5 की रेटिंग दी गई है।
यह फिल्म Netflix पर उपलब्ध है।
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