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'Border 2: आध्यात्मिक अनुवर्ती जो वही कहानी कहता है 2.0/5'

‘Border 2: आध्यात्मिक अनुवर्ती जो वही कहानी कहता है 2.0/5’

बॉर्डर 2: एक नई कहानी की पुरानी गूंज

जब हम आज की दुनिया में फिल्में देखते हैं, तो अक्सर ऐसा लगता है कि उनकी सफलता इस बात में नहीं है कि वे क्या हैं, बल्कि इस बात में है कि वे क्या नहीं हैं। यही शायद "बॉर्डर 2" की सबसे बड़ी पहचान होगी।

कहानी का सारांश

हाल के वर्षों में हिंदी सिनेमा में युद्ध पर आधारित फिल्मों की बाढ़ आ गई है। ऐसी फिल्मों में युद्ध को सिर्फ एक दुश्मन के खिलाफ लड़ाई के रूप में दिखाया जाता है। 1997 में आई "बॉर्डर" हमें भारतीय सैनिकों की वीरता की कहानी सुनाई थी, और अब इसका आध्यात्मिक सीक्वल "बॉर्डर 2" हमारे सामने है।

इस बार निर्देशक अनुराग सिंह ने कहानी को और भी विस्तृत बनाया है। "बॉर्डर 2" 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है, लेकिन यह केवल एक विशेष लड़ाई पर नहीं, बल्कि पूरे सुरक्षा परिदृश्य पर ध्यान केंद्रित करता है। आज का भारत उस भारत से बहुत भिन्न है, जिसे तीन दशकों पहले देखा गया था।

अभिनय और पात्र

फिल्म में मेजर होशियार सिंह दहिया (वरुण धवन), नौसेना अधिकारी एमएस रावत (आहान शेट्टी), और वायु सेना अधिकारी निर्मल जीत सिंह सेखों (दिलजीत दोसांझ) जैसे पात्र हैं। इन सभी के बीच कर्नल फतेह सिंह कालेर (सनी देओल) एक कड़ी के रूप में काम करते हैं।

हालांकि, फिल्म का बड़ा हिस्सा युद्ध की गूंज में भटका हुआ सा लगता है। यहां तक कि पाकिस्तान के सैनिकों का चित्रण भी हास्यास्पद तरीके से किया गया है। एक दृश्य में, एक पाकिस्तानी सैनिक कहता है, "हिंदुस्तान पर कयामत बरसेगी आज।" यह सब भले ही मजेदार लगे, लेकिन यह जमीनी सच्चाई से बहुत दूर है।

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निर्देशन और सिनेमैटोग्राफी

अनुराग सिंह की निर्देशन शैली में कुछ पलों में गहराई दिखाई देती है, जैसे वरुण धवन का अपने पत्नी को लिखा गया भावुक पत्र। ऐसे अंश फिल्म को एक अलग दृष्टिकोण देते हैं। हालाँकि, पूरे फिल्म में युद्ध की भव्यता और वीएफएक्स की कमी खटकती है।

संगीत और दर्शकों की प्रतिक्रिया

फिल्म का संगीत साधारण है और शायद ही कोई गाना यादगार बनता है। दर्शकों की प्रतिक्रिया भी मिश्रित रही है। कुछ ने इसे पुरानी यादों से जोड़ा, जबकि अन्य ने इसे केवल एक पुनरावृत्ति माना।

निष्कर्ष और रेटिंग

"बॉर्डर 2" को JioHotstar पर स्ट्रीम किया जा सकता है, और इसे 5 में से 2 की रेटिंग दी गई है।

क्या आप भी सोचते हैं कि आज की फिल्में अपने पूर्वजों की कहानियों को कितनी सही ढंग से प्रस्तुत कर रही हैं? क्या हमें पुरानी कहानियों को नए तरीके से बताने की जरूरत है? इस पर आपकी क्या राय है?

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