जेनिलिया देशमुख: अपने बेटे को न आंकें, उसके प्रमोशन से
किसी भी माँ के लिए अपने बच्चे के लिए सपने देखना, उसे साकार करने की कोशिश करना स्वाभाविक है। जेनिलिया देशमुख, जो खुद एक सफल अभिनेत्री हैं, अपने बेटे के प्रति इसी भावनात्मक जुड़ाव को लेकर बात कर रही हैं। जेनिलिया का मानना है कि हमें उसके छोटे बेटे की प्रतिभा और व्यक्तित्व को सिर्फ प्रमोशन्स के आधार पर नहीं आंकना चाहिए।
बेटे की मासूमियत
जेनिलिया कहती हैं, "हमेशा से यह कहा गया है कि बच्चों को देखकर ही उनकी प्रतिभा का अंदाजा लगाया जाता है। लेकिन मेरा मानना है कि हमें उनके मासूमियत को समझना चाहिए। छोटे बच्चे अपनी भावनाओं और सपनों के साथ खेलते हैं।" उनका यह कहना हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने बच्चों को उनकी वास्तविकता से अलग किसी छवि में ढालने की कोशिश कर रहे हैं।
बच्चे की पहचान
जेनिलिया ने इस बात पर जोर दिया कि हर बच्चे की पहचान और उसकी यात्रा अलग होती है। "हमारे बेटे को उसके प्रमोशन्स से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत और उसके सपनों से जानना चाहिए," उन्होंने कहा। यह एक महत्वपूर्ण संदेश है, जो हमें यह सिखाता है कि बच्चों के भविष्य की राह उनके संघर्षों और अनुभवों से तय होती है।
माँ का प्यार
एक माँ के रूप में, जेनिलिया ने यह भी बताया कि वह अपने बेटे को सिखाती हैं कि असली जीत न केवल पुरस्कारों में है, बल्कि अपने सपनों का पीछा करने और उन्हें साकार करने में है। "मैं चाहती हूँ कि मेरा बेटा जानें कि हर छोटी बड़ी चीज़ महत्वपूर्ण होती है," उन्होंने कहा। उनका यह विचार हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने बच्चों को उनके सपनों का पीछा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं?
प्लेटफॉर्म और रिलीज़
जेनिलिया का यह साक्षात्कार एक नई वेब सीरीज़ के प्रमोशन के दौरान हुआ, जो कि Netflix पर रिलीज़ होने वाली है।
जेनिलिया के विचारों से हमें यह सीख मिलती है कि बच्चों की पहचान उनके अनुभवों से बनती है। क्या आप अपने बच्चों को उनके सपनों का पीछा करने की स्वतंत्रता दे रहे हैं, या उन्हें किसी छवि में ढालने की कोशिश कर रहे हैं?








