फिल्म समीक्षा: "होमबाउंड" – एक यात्रा में दोस्ती और संघर्ष
आपने कभी सोचा है कि सपनों की दुनिया में कदम रखना कितना मुश्किल हो सकता है, खासकर जब आपके रास्ते में कई मुश्किलें हों? "होमबाउंड" इसी संघर्ष की कहानी है। यह फिल्म नीरज घायवान द्वारा निर्देशित एक मजबूत नाटक है, जो नॉर्दर्न इंडिया के एक छोटे से गांव में सेट है।
फिल्म की कहानी दो बचपन के दोस्तों, ईशान (ईशान खट्टर) और विशाल (विशाल जेतवा) की है, जो पुलिस अधिकारी बनने का सपना देखते हैं। उनके लिए यह एक ऐसा पेशा है जो उन्हें गरिमा और अपने हाशिए पर पड़ने वाले जीवन से बाहर निकलने का एक रास्ता दिखाता है। जैसे-जैसे वे राष्ट्रीय पुलिस परीक्षा की तैयारी करते हैं, उनकी दोस्ती की कसौटी भी कठिनाइयों में पड़ती है।
यह फिल्म हमें दिखाती है कि कैसे समाजिक असमानता, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और बढ़ती निराशा के बीच उनकी मित्रता पर दबाव बढ़ता है। जब वे अपने लक्ष्य के करीब पहुंचते हैं, तो उनकी दोस्ती में दरारें पड़ने लगती हैं। यह फिल्म हमें यह अनुभव कराती है कि सपने देखने की कीमत क्या होती है, खासकर जब समाज आपको नजरअंदाज करता है।
"होमबाउंड" में जान्हवी कपूर, चंदन आनंद और कई अन्य प्रतिभाशाली कलाकार भी हैं। इस फिल्म को 2025 के कांस फिल्म महोत्सव में ‘अन सर्टेन रिगार्ड’ अनुभाग में प्रदर्शित किया गया था, जहां इसे शानदार प्रतिक्रिया मिली थी।
यदि आप इस फिल्म का अनुभव करना चाहते हैं, तो "होमबाउंड" अब नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है। इसकी ओटीटी रिलीज़ 21 नवंबर 2025 को हुई थी।
इस फिल्म ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या आपके जीवन में कोई ऐसा सपना है, जिसे पूरा करने में आप संघर्ष कर रहे हैं? क्या आप उस सपने के लिए अपने रिश्तों को खतरे में डालने के लिए तैयार हैं? आइए, इस पर चर्चा करें!









