जानवर – द बीस्ट विदिन: एक दिलचस्प अपराध कथा
कभी-कभी हम अपनी ज़िंदगी के सबसे गहरे हिस्सों का सामना करते हैं, और ऐसा ही कुछ हमें ‘जानवर – द बीस्ट विदिन’ में देखने को मिलता है। ज़ी5 पर स्ट्रीम हो रही इस वेब सीरीज़ में भुवन अरोड़ा ने एक ऐसे इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई है, जो न केवल अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित है, बल्कि अपने व्यक्तिगत संघर्षों से भी जूझ रहा है।
कहानी का सार
सीरीज़ की कहानी हमें चंद शहर में ले जाती है, जहां सब-इंस्पेक्टर हेमंत कुमार (भुवन अरोड़ा) एक जटिल मामले का सामना करते हैं। एक बिना सिर का शव, गायब सोना, और एक लापता व्यक्ति—इन तीनों का संबंध एक ही शख्स से है, जो कहानी में धीरे-धीरे उजागर होता है। यह कहानी न केवल पहचान और जातिवाद के मुद्दों को छूती है, बल्कि इंसानियत और संघर्ष के गहरे पहलुओं पर भी प्रकाश डालती है।
अभिनय और निर्देशन
भुवन अरोड़ा ने हेमंत के किरदार में जान डाल दी है। उनका अभिनय इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक पुलिस अधिकारी भी मानवीय भावनाओं से भरा होता है। उनके साथ-साथ बडरुल इस्लाम ने कैरेक्टर काइलाश की भूमिका में जातिवाद और सामाजिक भेदभाव को बखूबी दर्शाया है।
निर्देशन की बात करें तो शचिंद्र वत्स ने कहानी को एक रोचक मोड़ दिया है। हालाँकि पहले तीन एपिसोड थोड़े धीमे लगते हैं, लेकिन बाद में कहानी में एक गहरा टर्न आता है। जब हेमंत असली अपराधी का सामना करता है, तो दृश्य एक नई दिशा में बढ़ जाता है।
सिनेमैटोग्राफी और संगीत
इस सीरीज़ की सिनेमैटोग्राफी हर दृश्य में गहराई और तनाव को महसूस कराती है। संगीत भी कहानी के अनुकूल है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली रही हैं। कुछ ने इसकी कहानी को पूर्वानुमानित बताया, लेकिन कई ने इसे एक gripping crime drama के रूप में स्वीकार किया।
निष्कर्ष
‘जानवर – द बीस्ट विदिन’ एक ऐसी सीरीज़ है जो इंसानियत और व्यक्तिगत संघर्षों के बीच की खाई को दिखाती है। यह एक साधारण अपराध कथा से अधिक है—यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हर व्यक्ति के भीतर एक ‘जानवर’ छुपा होता है, और वह ‘जानवर’ परिस्थितियों के अनुसार बाहर आता है।
यह सीरीज़ ज़ी5 पर स्ट्रीम हो रही है और इसे 5 में से 3 रेटिंग दी गई है।
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