• Home
  • Reviews
  • ‘Lucky The Superstar फिल्म की समीक्षा: एक झूलते हुए विचार जो पूरी तरह से हासिल नहीं कर पाता 2.5/5 JioHotstar’
'Lucky The Superstar फिल्म की समीक्षा: एक झूलते हुए विचार जो पूरी तरह से हासिल नहीं कर पाता 2.5/5 JioHotstar'

‘Lucky The Superstar फिल्म की समीक्षा: एक झूलते हुए विचार जो पूरी तरह से हासिल नहीं कर पाता 2.5/5 JioHotstar’

लकी द सुपरस्टार: एक प्यारे पालतू की कहानी

जब हम अपने चार-पैर वाले दोस्तों की बात करते हैं, तो उनके प्रति हमारी भावनाएँ अक्सर गहरी होती हैं। फिल्म "लकी द सुपरस्टार" इसी खूबसूरत रिश्ते की कहानी को बुनती है, लेकिन क्या यह हमारे दिलों को छूने में सफल होती है? आइए जानते हैं।

कहानी की शुरुआत

फिल्म की कहानी एक प्यारी सी कुतिया से शुरू होती है, जो एक बाढ़ में अपने नवजात पिल्लों को खो देती है। उसकी आखिरी पिल्ला, जिसे वह लकी का नाम देती है, एक दिन खो जाता है। इस खोज में उसकी माँ निकल पड़ती है। दूसरी ओर, लकी को एक युवक, लक्ष्मणन (जीवी प्रकाश) मिलता है, जो उसे अपनी ऑटिस्टिक भतीजी, अम्मू के लिए घर ले आता है। जैसे-जैसे लकी की किस्मत बदलती है, वह न केवल अम्मू के लिए उम्मीद बनता है, बल्कि कई शक्तिशाली व्यक्तियों के लिए लालच का भी कारण बनता है।

अभिनय का जादू

फिल्म में जीवी प्रकाश का अभिनय बेहद प्रभावशाली है। उन्होंने अपने पात्र को सजीव कर दिया है, लेकिन सहायक पात्रों का उपयोग सीमित है। कुत्तों की मां और उसके साथी कुत्तों को मानवीय आवाजें दी गई हैं, जो फिल्म में हास्य का एक अच्छा तत्व जोड़ते हैं। लेकिन क्या यह हास्य हमें गहरे सवालों पर सोचने के लिए मजबूर करता है? जैसे, क्या जानवरों में भी मानव निर्मित क्रूरता हो सकती है?

भावनाओं की कमी

हालांकि कहानी में संवेदनाओं की झलक है, फिर भी फिल्म लकी और अम्मू के बीच की बंधन को पूरी तरह से विकसित नहीं कर पाती। एक बच्चे का पिल्ले से खेलना तो स्वाभाविक है, लेकिन लकी के प्रति अम्मू की विशेषता क्या है? यह सवाल अनुत्तरित रह जाता है। इसके अलावा, ऑटिज़्म को एक मानसिक बीमारी के रूप में दिखाना, फिल्म को थोड़ा संवेदनहीन बना देता है।

READ  'गुल्लक फिल्म के असली प्रेरणाएँ: रणवीर सिंह के किरदारों की गहराई समझना'

दृश्य एवं संगीत

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी कुछ खास नहीं है, और संगीत भी सीमित है। जबकि कुत्तों के दृश्य मजेदार हैं, बाकी फिल्म में हास्य की कमी महसूस होती है। सत्ता के लोभी राजनीतिक पात्रों की छवि एकतरफा होती है, जो दर्शकों को थका देती है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, "लकी द सुपरस्टार" एक हल्की-फुल्की फिल्म है, जो हास्य और भावनाओं का मिश्रण प्रस्तुत करने की कोशिश करती है। लेकिन यह एक गहरी छाप छोड़ने में असफल रहती है। यदि फिल्म ने मानव-जानवर के बंधन पर अधिक ध्यान केंद्रित किया होता, तो यह दर्शकों के दिलों को छू सकती थी।

यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है और इसे 5 में से 2.5 की रेटिंग दी गई है।

क्या आपने कभी अपने पालतू जानवर के साथ ऐसे अनमोल पल बिताए हैं? इस फिल्म ने आपको किस तरह की भावनाएँ दी? अपने विचार साझा करें!

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

×