फिल्म का नाम: मोन मानें ना (Mon Maaney Naa)
क्या आपने कभी सोचा है कि प्यार की परिभाषा क्या होती है? हम सबके दिल में प्यार की एक खास जगह होती है, लेकिन क्या यह हमेशा एक जैसा होता है? "मोन मानें ना" एक ऐसी ही कहानी है जो हमें प्यार के अलग-अलग रंगों से रूबरू कराती है। यह फिल्म एक रोमांटिक ड्रामा है, जो खास तौर पर जेनरेशन Z के प्यार, दिल टूटने और जटिल रिश्तों की उलझनों को दर्शाती है।
इस फिल्म का निर्देशन किया है राहूल मुखर्जी ने, जिन्होंने इस कहानी में दो युवा प्रेमियों की भावनात्मक यात्रा को बखूबी पेश किया है। एक तरफ है बिदिशा (हिया चटर्जी), जो सपनों में खोई हुई और आदर्शवादी है। दूसरी तरफ है राहुल (ऋत्विक भौमिक), जो बॉलिवुड के रोमांस से प्रभावित एक रोमांटिक शख्स है। दोनों के बीच एक गहरी और जुनूनी प्रेम कहानी है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उनका रिश्ता टूटने लगता है। राहुल दिल टूटने के बाद आगे बढ़ने की कोशिश करता है, वहीं बिदिशा एक नई राह खोजने की कोशिश करती है।
कहानी में एक नया मोड़ तब आता है जब रनोjoy (सौम्य मुखर्जी) का प्रवेश होता है। यह एंट्री प्रेम के इस त्रिकोण में उलझन, तड़प और आत्म-खोज का नया आयाम जोड़ देती है। फिल्म में युवा ऊर्जा, सुरीले गाने और समकालीन रिश्तों के विषयों का बेहतरीन मिश्रण है। यह हमें प्यार की आधुनिक परिभाषाओं पर सवाल उठाने के लिए मजबूर करती है, जैसे "फ्रीलांस रोमांस" और "पूर्णकालिक प्रतिबद्धता"।
फिल्म का ट्रेलर हमें एक आने वाली उम्र की यात्रा के संकेत देता है, जिसमें जादू, पागलपन, दिल टूटना और पुराने-school रोमांस की खिंचाव शामिल है। यह सब कुछ एक भावनात्मक दौड़ में परिणत होता है, जहां पात्रों को अपने सच्चे भावनाओं का सामना करना पड़ता है।
"मोन मानें ना" 13 फरवरी 2026 को रिलीज होने जा रही है, और यह वैलेंटाइन डे के ठीक पहले आ रही है। यह फिल्म थिएटर में रिलीज होगी, और अभी कोई ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है।
क्या आप भी अपने अनुभवों के जरिए प्यार की इस बदलती परिभाषा पर विचार करना चाहेंगे? क्या आपके लिए प्यार का मतलब वही है जो फिल्म में दर्शाया गया है, या आप इससे कुछ अलग सोचते हैं? अपने विचार साझा करें!









