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'अमिताभ बच्चन की फिल्म Jhund में काम करने वाले प्रियंक्शु उर्फ बाबू छेत्री की नागपुर में झगड़े के बाद हत्या'

‘अमिताभ बच्चन की फिल्म Jhund में काम करने वाले प्रियंक्शु उर्फ बाबू छेत्री की नागपुर में झगड़े के बाद हत्या’

एक अनसुनी कहानी: प्रियंशु क्षत्रिय का दुखद अंत

बॉलीवुड की दुनिया में हर रोज़ कुछ नया होता है, लेकिन कुछ घटनाएँ हमें गहरे सदमे में डाल देती हैं। ऐसा ही कुछ हुआ जब प्रियंशु क्षत्रिय, जिसे हम सभी "बाबू छेत्री" के नाम से जानते हैं, की हत्या की खबर आई। यह घटना नागपुर में एक निर्माणाधीन इमारत के पास हुई, और इसने उनके प्रशंसकों और पूरे फिल्म उद्योग को स्तब्ध कर दिया।

दुःखद सुबह की कहानी

8 अक्टूबर, 2025 की सुबह, प्रियंशु का शव एक खाली इमारत में पाया गया। उनकी उम्र केवल 21 वर्ष थी। प्रियंशु और उनके दोस्त ध्रुव ने मंगलवार की रात को शराब पीने का निर्णय लिया था। लेकिन यह पार्टी जल्दी ही एक खूनी संघर्ष में बदल गई। पुलिस रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रियंशु ने ध्रुव को धमकी दी, जिसके बाद ध्रुव ने प्रियंशु पर हमला किया। यह घटना इतना भयावह थी कि प्रियंशु के शरीर पर कई चाकू के घाव थे और वह तारों से बंधा हुआ था।

एक हत्या का रहस्य

जैसे ही स्थानीय निवासियों ने प्रियंशु की चीखें सुनीं, उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। वरिष्ठ निरीक्षक अरुण क्षीरसागर ने कहा, "यह एक पार्टी थी जो नियंत्रण से बाहर हो गई। शराब और पुराने द्वेष ने इस हिंसा को जन्म दिया।" ध्रुव को गिरफ्तार कर लिया गया है, और पुलिस मामले की जांच कर रही है। हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू को भी बरामद किया गया है और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है।

प्रियंशु का संघर्ष और सपने

प्रियंशु की कहानी केवल एक अभिनेता की नहीं, बल्कि एक संघर्ष की कहानी है। नागपुर के रेलवे ट्रैक के पास बड़े होते हुए, उन्होंने अपने परिवार की मदद के लिए कोयला बेचा। यहीं पर उन्हें प्रसिद्ध निर्देशक नागराज मंजुले ने देखा और फिल्म "जुंड" में कास्ट किया। यह फिल्म उन बच्चों की कहानी थी जो झुग्गियों में रहते हैं और फुटबॉल को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाते हैं।

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हालांकि, प्रियंशु के जीवन में चुनौतियाँ कम नहीं थीं। उनके पास छोटे-मोटे अपराधों का इतिहास था, लेकिन उन्होंने पिछले दो वर्षों में अपने जीवन को सुधारने की कोशिश की। उनके परिवार ने कहा कि वे उम्मीद कर रहे थे कि प्रियंशु एक नए रास्ते पर चल रहे थे, लेकिन एक हत्या ने उनके सपनों को चुराकर उन्हें हमेशा के लिए छीन लिया।

न्याय की मांग

प्रियंशु के परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए। उनकी बहन शिल्पा ने कहा, "मेरे भाई ने सुधारने का वादा किया था, लेकिन अचानक एक हत्यारे ने उसे हमसे छीन लिया।" प्रियंशु की मौत ने न केवल उनके परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि हमें यह सोचने पर भी मजबूर किया है कि हमारे समाज में कितनी बुराइयाँ अभी भी व्याप्त हैं।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन कभी-कभी कितनी अनिश्चितता से भरा होता है। प्रियंशु क्षत्रिय का नाम अब एक दुखद अध्याय बन गया है, जो हमें याद दिलाता है कि हमें हमेशा अपने आस-पास के लोगों का ख्याल रखना चाहिए।

यह कहानी नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध "जुंड" फिल्म को और भी अर्थ देती है, जो प्रियंशु के जीवन को एक नई परिप्रेक्ष्य में देखने का मौका देती है।

क्या हम सभी को अपने समाज में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एकजुट नहीं होना चाहिए? क्या हम एक ऐसा वातावरण नहीं बना सकते जहाँ हर किसी को अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिले?

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