नयनाम: एक थ्रिलर जो दिल को छू लेती है
कभी-कभी, एक साधारण सी कहानी में भी गहराइयाँ छिपी होती हैं। "नयनाम" एक ऐसी वेब सीरीज़ है जो आपको उस गहराई में ले जाती है, जहाँ मनुष्य की जिज्ञासा, रहस्य और अपराध का मिलन होता है। इस सीरीज़ में हमें डॉ. नयन के रूप में वरुण सैंडेश की अदाकारी देखने को मिलती है, जो एक ऐसा डॉक्टर है, जिसे दूसरों की ज़िंदगी में झांकने का शौक है।
कहानी का सार
डॉ. नयन एक नेत्र रोग विशेषज्ञ है, जो अपने मरीजों की आँखों में एक विशेष तरल पदार्थ डालकर उनके जीवन की झलकियाँ देख सकता है। जब वह अपनी एक मरीज माधवी (प्रियंका जैन) की ज़िंदगी में झाँकता है, तो उसे एक चौंकाने वाला सच पता चलता है — माधवी अपने पति की हत्या करती है। नयन पुलिस के पास जाता है, लेकिन उसे कोई गंभीरता से नहीं लेता। अब नयन को खुद इस हत्या की गुत्थी सुलझानी है। क्या वह सफल होगा? यही इस थ्रिलर का मुख्य प्रश्न है।
अभिनय और निर्देशन
स्वाति प्रकाश द्वारा निर्देशित "नयनाम" एक दिलचस्प विषय पर आधारित है। भारतीय समाज में दूसरों की ज़िंदगियों में दिलचस्पी रखना एक सामान्य सी बात है। वरुण सैंडेश ने इस भूमिका में अपनी प्रतिभा का जादू बिखेरा है। उनकी परफॉर्मेंस में एक अलग ही गहराई है, जो दर्शकों को उनके किरदार से जोड़ती है। प्रियंका जैन ने अपने किरदार में खूबसूरती और बुद्धिमत्ता का अद्भुत मिश्रण पेश किया है, जो कहानी में और भी रोचकता लाता है।
सिनेमैटोग्राफी और संगीत
इस सीरीज़ की सिनेमैटोग्राफी शानदार है। अजय अरसाडा का बैकग्राउंड स्कोर कहानी की तटस्थता को और बढ़ा देता है। हर दृश्य में गहराई और तनाव का अहसास होता है, जो दर्शकों को बांधे रखता है। निर्देशक ने जिस तरह से अपनी कहानी को प्रस्तुत किया है, वह OTT प्लेटफॉर्म के लिए एकदम सही है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
"नयनाम" की शुरुआत थोड़ी धीमी है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह दर्शकों को अपने रंग में रंग देती है। अंतिम तीन एपिसोड तो एकदम थ्रिलिंग हैं, जो आपको अपने सीट पर बैठे रहने के लिए मजबूर कर देते हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, "नयनाम" एक अच्छी तरह से निर्मित क्राइम ड्रामा है, जिसमें शानदार प्रदर्शन और ठोस थ्रिल्स हैं। यह सीरीज़ न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि आपको सोचने पर भी मजबूर करती है। आप इसे Zee5 पर स्ट्रीम कर सकते हैं।
रेटिंग: 3/5
क्या आप कभी किसी की ज़िंदगी में झांकने की इच्छा रखते हैं? क्या आपको लगता है कि यह जिज्ञासा हमें किस दिशा में ले जा सकती है?









