पारधा: एक अनकही कहानी
किसी ने ठीक ही कहा है, "कुछ पर्दे शर्म को छिपाते हैं, तो कुछ ताकत को।" और इसी ताकत का अहसास कराती है फिल्म "पारधा", जो तीन महिलाओं की गहरी और भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है। यह कहानी है सुभा, रत्नम्मा, और राग की, जिनकी ज़िंदगी एक दूसरे के साथ चुप्पी, बलिदान, और राज़ों के धागों से बंधी हुई है।
सुभा, जो अपने अतीत के बोझ तले दबी हुई है, वह एक छोटे से गांव में redemption की तलाश में है। इस गांव में समय थम गया है और परंपराएं सच से भी बड़ी हो जाती हैं। रत्नम्मा, जो एक मजबूत लेकिन घायल महिला है, एक ऐसे विरासत की रक्षा कर रही है जिसके लिए उसने कभी नहीं मांगा। वहीं, राग, जो सबसे छोटी है, हर चीज पर सवाल उठाती है, खासकर उस पर्दे पर जो केवल चेहरों को ही नहीं, बल्कि गहरे राज़ों को भी छिपाए हुए है।
जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, हम देखते हैं कि कैसे ये महिलाएं उस दुनिया का सामना करती हैं जो आज्ञाकारिता की मांग करती है लेकिन जागरूकता से डरती है। एक पल में एक चेहरा प्रकट होता है, फिर तुरंत ही छिपा लिया जाता है, और यही इस फिल्म का दिल है। पर्दे के पीछे केवल पहचान नहीं है, बल्कि एक बड़ा सामना भी है।
फिल्म में शानदार दृश्यों के लिए जिम्मेदार हैं मृदुल सुजीत सेन और गहरी संगीत रचना की है गोपी सुंदर ने। "पारधा" केवल एक कहानी नहीं, बल्कि एक चुनौती है, जो आपके ध्यान की मांग करती है।
यह फिल्म 21 अगस्त 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है, और फिलहाल इसे किसी भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नहीं देखा जा सकता।
तो, क्या आप तैयार हैं इस अनकही कहानी का हिस्सा बनने के लिए? क्या आपको लगता है कि पर्दे के पीछे छिपे राज़ कभी उजागर हो पाएंगे? यह सवाल आपके मन में कई विचार पैदा कर सकता है। चलिए, इस चर्चा में शामिल हों!









