फिल्म “पोचम्मा” एक दिलचस्प और रोमांचक कहानी है, जो न केवल डरावनी है, बल्कि हमें गांव की परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं के बीच की जटिलताओं से भी रूबरू कराती है। यह कहानी एक छोटे से गांव में स्थित है, जहां एक महिला की जीवन यात्रा उसकी आस्था और गांव की देवी पोचम्मा के साथ गहराई से जुड़ी हुई है।
कहानी की शुरुआत एक साधारण श्रद्धा से होती है, लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, यह श्रद्धा नियमों और परंपराओं में बदल जाती है। यह महिला, जो अपनी आस्था में डूबी हुई है, गांव के लोगों की उम्मीदों और अपनी इच्छाओं के बीच फंस जाती है। उसके हर निर्णय पर नजर रखी जाती है, और उसे यह समझने में कठिनाई होती है कि क्या वह सच में अपनी आस्था का पालन कर रही है या फिर उसे दूसरों के लिए अपने सपनों और इच्छाओं को कुर्बान करना पड़ेगा।
जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दबाए गए गुस्से और अनकही सचाइयाँ बाहर आती हैं। यह हमें सवाल करती है कि क्या आस्था केवल कुछ के लिए सुकून देती है, जबकि दूसरों पर नियंत्रण करती है। “पोचम्मा” हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि विश्वास कितनी दूर तक जा सकता है, और क्या यह उन लोगों को भी निगल सकता है, जिनकी रक्षा करने का यह दावा करती है।
यह टेलीग्राम शो 17 अप्रैल 2026 को “आहा” प्लेटफार्म पर रिलीज होने वाला है।
क्या आप भी कभी ऐसे हालात में रहे हैं, जहां आपकी आस्था और समाज की अपेक्षाएँ एक दूसरे के खिलाफ खड़ी हों? अपने विचार हमारे साथ साझा करें!








