सलाकार: एक नीरस जासूसी थ्रिलर की कहानी
जब भी हम जासूसी थ्रिलर के बारे में सोचते हैं, तो हमारे मन में रोमांचक, तेज़-तर्रार और रहस्यमय घटनाओं की छवियाँ आती हैं। लेकिन सलाकार ने इस उम्मीद को पूरी तरह से धराशायी कर दिया है। यह वेब सीरीज़ एक साधारण जासूसी कहानी में तब्दील हो गई है, जिसमें न तो कोई गहराई है और न ही कोई दिलचस्प मोड़।
कहानी का सारांश
सलाकार की कहानी दो समय सीमाओं में बंटी हुई है – एक 1978 में और दूसरी 2025 में। हमें एक बहादुर भारतीय जासूस के बारे में बताया जाता है, जो एक गुप्त मिशन पर निकलता है ताकि पाकिस्तान के एक परमाणु संयंत्र की योजना को बेनकाब किया जा सके। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, हमें यह महसूस होता है कि यह कहानी अपनी ही जटिलता में उलझ गई है।
अभिनय और निर्देशन
नवीन कस्तूरिया और मौनी रॉय जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद, फिल्म में उनके प्रदर्शन में कोई चमक नहीं है। निर्देशन में भी एक ठहराव नजर आता है, जो दर्शकों को बांधने में नाकामयाब रहता है। फिल्म का हर दृश्य ऐसा लगता है जैसे इसे जल्दबाज़ी में शूट किया गया हो।
सिनेमैटोग्राफी और संगीत
सिनेमैटोग्राफी साधारण है और संगीत में वह जादू नहीं है जो एक जासूसी थ्रिलर में होना चाहिए। एक रैप गाना, जो 1970 के दशक के पृष्ठभूमि में रखा गया है, पूरी तरह से असंगत लगता है। यह पूरी कहानी के साथ खिलवाड़ करता है, और इससे दर्शकों की उम्मीदें और भी गिर जाती हैं।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
सलाकार को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। कई लोगों ने इसे नीरस और बोरिंग बताया है, जबकि कुछ ने इसके विषय की सराहना की है। लेकिन यह साफ है कि सीरीज़ ने अपने वादों को पूरा नहीं किया है।
निष्कर्ष
सलाकार, जो जियोहॉटस्टार पर उपलब्ध है, एक ऐसी सीरीज़ है जो अपने विषय में गहराई और रोमांच की कमी महसूस कराती है। इसे 1.5/5 की रेटिंग दी गई है।
क्या आप भी ऐसी सीरीज़ का अनुभव कर चुके हैं जो आपके उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी? अपने विचार हमारे साथ साझा करें!









