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'Sarzameen' की समीक्षा: पृथ्वीराज, काजोल और इब्राहीम अली खान की 'Mission Kashmir' ने जाना पुरानी कहानी का रास्ता 2.5/5 JioHotstar

‘Sarzameen’ की समीक्षा: पृथ्वीराज, काजोल और इब्राहीम अली खान की ‘Mission Kashmir’ ने जाना पुरानी कहानी का रास्ता 2.5/5 JioHotstar

सारज़मीन: एक परिचय

जब आप एक फिल्म देखते हैं, तो आप उम्मीद करते हैं कि वो आपको अपने साथ में बहा ले जाए, लेकिन क्या होता है जब वो सिर्फ परिचित दृश्यों के बीच घूमती रहे? "सारज़मीन" एक ऐसी ही फिल्म है, जो हमें कश्मीर की खूबसूरत लेकिन खतरनाक ज़मीनी हकीकत में ले जाती है। इस फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन, काजोल और इब्राहीम अली खान जैसे सितारे हैं, लेकिन क्या ये कलाकार अपने अभिनय से फिल्म को ऊँचाई पर ले जा पाते हैं? चलिए, जानते हैं।

कहानी का सार

फिल्म की कहानी है विजय मेनन (प्रथवीराज सुकुमारन), एक समर्पित सेना के जवान की, जो अपने कर्तव्यों के प्रति अडिग है। उनका बेटा हरमन (इब्राहीम अली खान) एक संवेदनशील युवा है, जिसे अपनी पहचान और परिवार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। और काजोल की भूमिका में मेहर, एक मजबूत माँ और पत्नी है, जो अपने परिवार को एकजुट रखने की कोशिश करती है।

भावनाओं का संघर्ष

सारज़मीन एक सामान्य परिवार की कहानी है, जो कश्मीर में रह रहा है। विजय का सपना है कि उसका बेटा भी उसके जैसा मजबूत बने, लेकिन अपने पिता की छाया में हरमन की कमजोरी साफ नजर आती है। काजोल का किरदार मेहर, इस संघर्ष में एक पुल का काम करती है, वो अपने पति और बेटे के बीच सामंजस्य बनाने की कोशिश करती है। उनका यह प्रयास दर्शाता है कि कैसे पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाले दर्द को खत्म किया जा सकता है।

खतरे की घंटी

फिल्म की कहानी में मोड़ तब आता है जब हरमन का अपहरण हो जाता है। यहाँ से कहानी उस दिशा में बढ़ती है, जहाँ विजय को अपने देश के प्रति कर्तव्य और अपने परिवार के प्रति प्यार के बीच चयन करना पड़ता है। यह संघर्ष हमें एक बार फिर उस पुराने कथानक की याद दिलाता है, जिसमें सेना अपने परिवार से ज्यादा देश को प्राथमिकता देती है।

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निर्देशन और लेखन

कायोज ईरानी की निर्देशन में यह फिल्म कई बार गंभीर विषयों को छूती है, लेकिन इसका लेखन उतना प्रभावी नहीं है। संवाद और कहानी में गहराई की कमी है, जिससे कई मौकों पर यह फिल्म पूर्वानुमानित लगती है। काजोल और पृथ्वीराज के अभिनय में कोई कमी नहीं है, लेकिन स्क्रिप्ट की कमजोरियों के कारण वो अपनी पूरी क्षमता को नहीं दिखा पाते।

संगीत और सिनेमैटोग्राफी

फिल्म का संगीत भावनाओं को जगाने में असफल रहता है। यह परिवार और देश के प्रति भावनाओं को व्यक्त करने का प्रयास करता है, लेकिन यह कहानी को आगे बढ़ाने में मदद नहीं करता। सिनेमैटोग्राफी कश्मीर की खूबसूरती को दर्शाने में सफल है, लेकिन इसके अलावा और कुछ विशेष नहीं है।

दर्शकों की प्रतिक्रिया

"सारज़मीन" ने दर्शकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएँ प्राप्त की हैं। कुछ को इसमें भावनात्मक गहराई दिखाई दी, जबकि अन्य इसे एक सामान्य और पूर्वानुमानित कहानी मानते हैं।

निष्कर्ष

अंततः, "सारज़मीन" एक ऐसा अनुभव है जो आपको सोचने पर मजबूर करता है, लेकिन यह अपने आप में एक खोया हुआ अवसर है। यह फिल्म एक प्रेरणादायक कहानी हो सकती थी, लेकिन इसकी पूर्वानुमानित कथा और कमजोर लेखन इसे एक साधारण फिल्म में तब्दील कर देते हैं।

यह फिल्म JioHotstar पर उपलब्ध है और इसे 5 में से 2.5 की रेटिंग दी गई है।

क्या आपको लगता है कि इस तरह की कहानियाँ हमें हमारे देश के प्रति अधिक जागरूक बनाती हैं, या ये सिर्फ एक व्यावसायिक प्रयास हैं?

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