सरजमीं: एक फिल्म जो उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी
कई बार, एक फिल्म की रिलीज़ के साथ ही उसके प्रति उम्मीदें आसमान छूने लगती हैं। दर्शक अपने पसंदीदा सितारों की अदाकारी और कहानी की गहराई के लिए बेताब रहते हैं। लेकिन जब वही फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो निराशा का एक सैलाब उठता है। ऐसा ही कुछ हाल ही में ‘सरजमीं’ के साथ हुआ, जिसमें दिखे हैं पृथ्वीराज और काजोल।
उम्मीदों का सागर
‘सरजमीं’ की घोषणा के साथ ही दर्शक उत्साहित थे। काजोल की मासूमियत और पृथ्वीराज की गंभीरता ने सभी को आकर्षित किया। लेकिन जब फिल्म रिलीज़ हुई, तो दर्शकों ने अपनी निराशा छिपाने की कोशिश नहीं की। सोशल मीडिया पर फैंस ने फिल्म को ‘नीचे’ बताते हुए अपने विचार व्यक्त किए।
कहानी की कमी
फिल्म की कहानी में वह गहराई नहीं थी, जिसकी उम्मीद थी। दर्शकों ने महसूस किया कि संवादों में वो तागत नहीं थी, जो उन्हें एक अच्छे अनुभव में डुबो सके। काजोल और पृथ्वीराज की केमिस्ट्री को भी किसी तरह से सही तरीके से पेश नहीं किया गया, जिससे दर्शकों का जुड़ाव कमज़ोर पड़ गया।
भावनाओं का अभाव
फिल्म में कई भावनात्मक मोड़ थे, लेकिन वे दर्शकों को छूने में नाकाम रहे। दर्शकों ने यह महसूस किया कि कहानी में कहीं न कहीं एक कमी थी, जो उन्हें उस भावनात्मक यात्रा पर नहीं ले जा सकी, जिसकी वे तलाश कर रहे थे।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर फैंस ने अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा कि फिल्म ने उन्हें निराश किया। कुछ ने तो यह तक कहा कि यह फिल्म उनके लिए एक ‘खराब अनुभव’ बन गई।
फिल्म की उपलब्धता
यदि आप भी ‘सरजमीं’ को देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म हाल ही में Netflix पर रिलीज़ हुई है।
इन सभी बातों के बाद, क्या आप भी इस फिल्म को देखने का विचार बना रहे हैं, या फिर इसकी निराशाजनक समीक्षाओं के बाद आप इसे छोड़ना बेहतर समझते हैं? आपके विचार क्या हैं?









