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'Tabu ने फिल्मी परिवार से होने के बावजूद कभी अपने पिता का उपनाम क्यों नहीं अपनाया—जानिए'

‘Tabu ने फिल्मी परिवार से होने के बावजूद कभी अपने पिता का उपनाम क्यों नहीं अपनाया—जानिए’

तब्बू का उपनाम रहस्य: एक अनकही कहानी

जब हम बॉलीवुड की glamorous दुनिया की बात करते हैं, तो अक्सर बड़े नामों और परिवारों की छाया में कई सितारे चमकते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ सितारे अपने परिवार के नाम को पीछे छोड़कर अपनी पहचान खुद बनाते हैं? ऐसी ही एक कहानी है तब्बू की।

एक अनोखी राह

तब्बू, जो कि एक प्रतिष्ठित फिल्म परिवार से आती हैं, ने अपने पिता का उपनाम अपने करियर में कभी नहीं लिया। यह निर्णय उनके लिए किसी छवि या उद्योग के दबाव के चलते नहीं था, बल्कि यह उनके व्यक्तिगत अनुभवों का परिणाम था। उनके बचपन का अनुभव, पारिवारिक ढांचा और अपने पिता से भावनात्मक दूरी ने इस निर्णय को आकार दिया। तब्बू ने अपने टैलेंट के आधार पर अपनी पहचान बनाई, न कि किसी उपनाम या परंपरा पर।

रिश्तों की जटिलता

तब्बू की माँ, रिज़वाना, मशहूर लेखक-शायर कैफी आज़मी की बहन हैं, और वह अनुभवी अदाकारा शबाना आज़मी और सिनेमैटोग्राफर बाबा आज़मी की भतीजी भी हैं। लेकिन उनके पिता, जमाल हाश्मी, से उनका रिश्ता कभी भी करीबी नहीं रहा। जब वह केवल तीन साल की थीं, तब उनके माता-पिता का तलाक हो गया। इसके बाद, उन्होंने अपने पिता के साथ कभी भी समय नहीं बिताया और न ही उन्हें अपने जीवन में महत्व दिया।

अपने नाम से पहचान

तब्बू ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था, “मैंने अपने दादा-दादी के साथ रहना शुरू किया। मेरी माँ एक शिक्षिका थीं, और मैंने अपनी दादी के साथ ज्यादा समय बिताया। मुझे कभी भी अपने पिता का उपनाम लेने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। हमेशा से मैं तबास्सुम फातिमा रही, जो मेरा मध्य नाम था।”

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करियर की शुरुआत

तब्बू का असली नाम तबास्सुम है, लेकिन देव आनंद ने उन्हें "तब्बू" नाम दिया। उन्होंने "हम नौजवान" फिल्म में अपने करियर की शुरुआत की। इसके पहले, उन्होंने एक छोटे बच्चे के रूप में "बाज़ार" में काम किया।

तब्बू ने अपने करियर में कई चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। "माचिस," "चाँदनी बार," "हैदर," "मकबूल," "इरुवर," और "द नेमसेक" जैसी फिल्मों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें एक अद्वितीय स्थान दिलाया।

आने वाली परियोजनाएँ

तब्बू अब एक पैन-इंडिया फिल्म में विजय सेतुपति के साथ नजर आएंगी, जो पुरी जगन्नाथ द्वारा निर्देशित है, और प्रियदर्शन की "भूत बंगला" में अक्षय कुमार के साथ भी काम करेंगी।

तब्बू की कहानी हमें यह सिखाती है कि नाम और उपनाम से ज्यादा महत्वपूर्ण है अपने आप को पहचानना और अपने टैलेंट पर भरोसा करना।

क्या आप भी मानते हैं कि असली पहचान हमारे काम और मेहनत में होती है, न कि हमारे परिवार के नाम में? क्या एक नाम वास्तव में हमारी पहचान को परिभाषित करता है? अपने विचार हमारे साथ साझा करें!

यह लेख नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई तब्बू की नई वेब सीरीज़ "धुरंधर" के संदर्भ में है।

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