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'O’Romeo के कलाकारों की सैलरी: शाहिद कपूर को मिले ₹45 करोड़, जबकि विक्रांत मैसी और तमन्ना ने लिया शून्य फीस?'

‘O’Romeo के कलाकारों की सैलरी: शाहिद कपूर को मिले ₹45 करोड़, जबकि विक्रांत मैसी और तमन्ना ने लिया शून्य फीस?’

ओ’रोमियो: एक रोमांचक यात्रा

कभी-कभी, एक फिल्म का नाम ही उसके अंदर छिपी कहानी को बयां कर देता है। "ओ’रोमियो" भी कुछ ऐसा ही है। ये नाम सुनकर मन में एक रोमांच और जिज्ञासा जगती है। क्या ये प्रेम कहानी है, या फिर इसमें एक्शन और ड्रामा का तड़का है? चलिए, इस फिल्म के बारे में जानते हैं और देखते हैं कि पर्दे पर क्या जादू बिखेरा गया है।

कहानी का सारांश

निर्देशक विशाल भारद्वाज की इस फिल्म में, शाहिद कपूर ने मुख्य भूमिका में गैंगस्टर उस्तारा का किरदार निभाया है। 1990 के दशक के मुंबई में सेट, यह कहानी हमें एक ऐसे युवा गैंगस्टर की जिंदगी में ले जाती है, जो एक महिला अफशा (त्रिप्ति डिमरी) की मदद से अपने जीवन में एक नया मोड़ लाता है। अफशा अपने पति की हत्या का बदला लेने के लिए उस्तारा की मदद मांगती है, और यहीं से कहानी में एक नया मोड़ आता है जब उस्तारा उसके प्रति भावनाएं विकसित करने लगता है।

जब्बर कलाकारों की टोली

इस फिल्म में न केवल शाहिद कपूर हैं, बल्कि त्रिप्ति डिमरी, नाना पाटेकर, अविनाश तिवारी, दिशा पटानी, तमन्ना भाटिया और विक्रांत मैसी जैसे अन्य जाने-माने कलाकार भी शामिल हैं। इन सभी ने अपने-अपने किरदारों में जान डालने का काम किया है।

कलाकारों की फीस

फिल्म के कास्ट की फीस भी चर्चा का विषय बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • शाहिद कपूर: उस्तारा का किरदार निभाने के लिए उन्हें ₹45 करोड़ मिले, जो इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे अधिक है।
  • त्रिप्ति डिमरी: अफशा के रूप में उन्होंने ₹6 करोड़ की फीस हासिल की।
  • अविनाश तिवारी: खलनायक जलाल की भूमिका में, उन्हें ₹7 करोड़ मिले।
  • दिशा पटानी: उन्होंने ₹2 करोड़ की फीस में अपने छोटे से किरदार को निभाया।
  • विक्रांत मैसी और तमन्ना भाटिया: ये दोनों कलाकार अपनी भूमिकाओं के लिए कोई फीस नहीं ली, जो कि कई फैंस के लिए चौंकाने वाला था।
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फिल्म का वास्तविकता से जुड़ाव

"ओ’रोमियो" हुसैन ज़ैदी की किताब "माफिया क्वीनस ऑफ मुंबई" से प्रेरित है। यह फिल्म हमें उस समय के मुंबई की परछाई में ले जाती है, जब गैंगस्टर का राज चलता था।

फिल्म देखने का अनुभव

क्या आप इस फिल्म को देखने का मन बना चुके हैं? "ओ’रोमियो" अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।

आपकी राय

क्या आपको लगता है कि इस तरह की कहानियाँ हमारे समाज में प्रासंगिक हैं? क्या आप फिल्म देखने के बाद इसके किरदारों के साथ जुड़ पाएंगे? अपने विचार हमारे साथ साझा करें!

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