हर शrirenu को चाहिए एक Madhu: एक नई सोच की शुरुआत
क्या आपने कभी सोचा है कि एक साधारण सी कहानी कैसे समाज के गहरे मुद्दों को उजागर कर सकती है? हाल ही में, धर्मा प्रोडक्शंस ने Netflix पर एक फिल्म रिलीज की है, जिसका नाम है "आप जैसा कोई"। इस फिल्म में आर. माधवन और फातिमा सना शेख ने मुख्य भूमिका निभाई है। यह फिल्म न केवल एक रोमांटिक कॉमेडी है, बल्कि यह हमारे समाज में व्याप्त लैंगिक पूर्वाग्रहों और छिपी हुई पितृसत्ता पर एक मजबूत प्रकाश डालती है।
एक आधुनिक व्यक्ति की कहानी
फिल्म में आर. माधवन ने शrirenu का किरदार निभाया है, जो अपने आपको एक आधुनिक व्यक्ति समझता है। लेकिन, एक दिन उसकी जिंदगी में एक औरत आती है, जिसे वह अपनी मधुबाला मानता है—मधु बोस, जो फातिमा सना शेख द्वारा निभाई गई है। यह कहानी इस बात की है कि कैसे एक ‘वोक’ व्यक्ति भी अपनी सोच में कितनी पितृसत्तात्मकता रखता है।
पितृसत्ता की सच्चाई
शrirenu का यह भ्रम कि वह एक प्रगतिशील व्यक्ति है, उसे तब टूटता है जब मधु उसकी सोच को चुनौती देती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक शिक्षित व्यक्ति, जो अपने आपको आधुनिक समझता है, दरअसल अपने बड़े भाई की तरह ही पितृसत्तात्मक है। इस फिल्म का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह समाज में गहरे पैठे पितृसत्तात्मक विचारों को उजागर करना है।
एक आवश्यक सीक्वल
फिल्म ने एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दिया है कि कैसे पुरुष अपनी पितृसत्तात्मकता को पहचानने में असफल रहते हैं। आर. माधवन का किरदार, शrirenu, यह स्वीकार करता है कि वह भी इस समस्या का हिस्सा है। यह एक ऐसा क्षण है, जिसे भारतीय सिनेमा में बहुत समय से देखा नहीं गया है। जब कोई पुरुष अपनी गलतियों को स्वीकार करता है, तो यह न केवल उसके लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश होता है।
बदलाव की आवश्यकता
हम सभी जानते हैं कि पितृसत्ता को समाप्त करने का एक बड़ा हिस्सा पुरुषों की सोच का बदलाव है। फिल्म में शrirenu यह मानता है कि वह गलतियाँ करेगा, लेकिन वह मधु से अपने व्यवहार को सुधारने का आग्रह करता है। यही वह बदलाव है, जिसकी इस देश को आवश्यकता है।
फिल्म "आप जैसा कोई" ने यह संदेश दिया है कि पुरुषों को अपनी पितृसत्तात्मक सोच को पहचानने और उसे बदलने की आवश्यकता है। अगर वे एक मधु से नहीं मिले, तो कम से कम एक शrirenu अपने आप को बदलने का साहस दिखाए।
प्लेटफॉर्म की जानकारी
यह फिल्म Netflix पर उपलब्ध है, और यह निश्चित रूप से एक जरूरी देखी जाने वाली फिल्म है।
क्या आपने कभी सोचा है कि आप अपनी सोच में कितने पितृसत्तात्मक हैं? क्या आप अपने आस-पास की महिलाओं की आवाज़ को सुनने के लिए तैयार हैं? चलिए, इस पर चर्चा करते हैं!








