• Home
  • Reviews
  • ‘Panchayat Season 4 की समीक्षा: Mirzapur का असर हमारी लौकी की सब्जी में बहुत ज़्यादा पोटाश है 2.5/5 Amazon Prime Lite’
'Panchayat Season 4 की समीक्षा: Mirzapur का असर हमारी लौकी की सब्जी में बहुत ज़्यादा पोटाश है 2.5/5 Amazon Prime Lite'

‘Panchayat Season 4 की समीक्षा: Mirzapur का असर हमारी लौकी की सब्जी में बहुत ज़्यादा पोटाश है 2.5/5 Amazon Prime Lite’

पंचायत सीजन 4: क्या उम्मीदें कर रही हैं धुंधली?

जब हम पहली बार पंचायत की दुनिया में कदम रखते हैं, तो एक उम्मीद से भरा दिल लेकर चलते हैं। यह वह दुनिया है जहां सपने अभी भी जीवित हैं, भले ही भारतीय ग्रामीण जीवन की कठिनाइयां उन्हें दबाने की कोशिश कर रही हों। लेकिन पंचायत सीजन 4 में हम देखते हैं कि क्या यह उम्मीद अब भी जिंदा है, या फिर यह धुंधली हो गई है।

कहानी की रोचकता

पंचायत सीजन 4 का कथानक चुनावों के चारों ओर घूमता है, जहां प्रधान जी (रघुवीर यादव) के ऊपर हुए हमले की गुत्थी सुलझाने के लिए दर्शक अधीर हैं। अभिषेक (जितेंद्र कुमार) अब उस गांव का हिस्सा बन चुके हैं, जिसे वह कभी नापसंद करते थे। इस बार भूसन (दुर्गेश कुमार) और उनकी पत्नी क्रांति (सुनीता राजवार) चुनाव जीतने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। क्या मनजू देवी (नीना गुप्ता) अपनी सत्ता बरकरार रख पाएंगी, या फिर फुलेरा अंधेरे की ओर बढ़ रहा है?

पहले की यादें

हम जब पहली बार अभिषेक से मिले थे, तो वह एक निराश युवक थे, जो एक ऐसे गांव में आए थे जहां विकास की किरणें भी नहीं पहुंची थीं। उस समय हमें इस शो से जो उम्मीद मिली थी, वह महामारी के दौरान हमारे लिए संजीवनी की तरह थी। दो सीज़न बीत गए और इस उम्मीद ने हमें पूरी तरह से बांध रखा था। लेकिन तीसरे सीजन में हम इस दुनिया में कुछ ऐसा देखना शुरू करते हैं, जो पहले से ही भरपूर हो चुका है — और यह ठीक नहीं लगता।

READ  'Only Murders In The Building Season 5 की समीक्षा: इस बोरिंग शो में बड़ा दुश्मन ऑटोकरrekt है 2.5/5 SonyLIV'

सीजन 4 का नया मोड़

पंचायत सीजन 4 में चुनावी गतिविधियों के साथ-साथ खेल शुरू हो चुका है। लेकिन जब शो अपने गंभीर मुद्दों को 너무 गंभीरता से लेने लगता है, तो यह फुलेरा के लिए एक अजीब स्थिति बन जाती है। पहले के सीज़नों में हमने मृत्यु का सामना किया था, लेकिन इस बार कहानी में वही सहानुभूति की कमी महसूस होती है। पंचायत को दर्शकों के साथ बढ़ना चाहिए — अच्छाई सिखाना चाहिए या फिर सरल और प्रभावशाली हास्य के जरिए मनोरंजन करना चाहिए।

प्रदर्शन की चमक

इस बार अभिषेक का किरदार एक खूबसूरत विकास को दर्शाता है। वह अब उस गांव से दूर जाने में हिचकिचाते हैं, जबकि पहले वह सिर्फ जाने का सपना देखते थे। मनजू देवी की भूमिका में नीना गुप्ता ने अपने अंदर की शक्ति को पहचाना है और अब वह अपनी आवाज को मजबूती से रखती हैं। लेकिन, जहां इन किरदारों का विकास होता है, वहीं कहानी में कुछ कमी महसूस होती है।

उम्मीद का धुंधलापन

हालांकि, पंचायत सीजन 4 में कुछ तत्व ऐसे हैं जो इसे एक नया मोड़ देते हैं। लेकिन जब यह शो ‘मिर्जापुर’ और ‘पीपली लाइव’ की तासीर में ढलने लगता है, तो यह अपने मूल को खो देता है। क्या यह वह समय है जब निर्माताओं को इसे समाप्त करने का विचार करना चाहिए या फिर एक और मौका देना चाहिए?

निष्कर्ष

पंचायत सीजन 4 अब Amazon Prime Video पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है। क्या यह सीजन हमें फिर से उम्मीद की किरण दिखाएगा या हमें निराश करेगा? इसे 5 में से 2.5 की रेटिंग दी गई है।

READ  'AIR(All India Rankers) की समीक्षा: हर्ष रोशन की सीरीज में हंसी और जीवन के सबक हैं, 3.5/5 ETV Win'

क्या आपको लगता है कि पंचायत को अपने मूल तत्वों पर वापस लौटने की जरूरत है? या आप इसे नए प्रयोगों के लिए खुला रखते हैं? आपकी क्या राय है?

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button
×